कोयलीबेड़ा में अनिश्चितकालीन चक्काजाम , 68 गांवों के ग्रामीण और 18 पंचायतों के प्रतिनिधि आंदोलन में शामिल

कोयलीबेड़ा में अनिश्चितकालीन चक्काजाम का आगाज, 68 गांवों के ग्रामीण और 18 पंचायतों के सरपंच आंदोलन में शामिल

कोयलीबेड़ा। क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याओं, अधूरे विकास कार्यों और प्रशासनिक उपेक्षा के विरोध में बुधवार से कोयलीबेड़ा में अनिश्चितकालीन चक्काजाम आंदोलन की शुरुआत हो गई। सर्व आदिवासी समाज और गोंडवाना समन्वय समिति के बैनर तले शुरू हुए इस आंदोलन में 68 गांवों के ग्रामीणों के साथ 18 पंचायतों के सरपंच बड़ी संख्या में शामिल हुए। सुबह से ही आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। आंदोलन के चलते क्षेत्र में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही और कई मार्गों पर आवाजाही बाधित हुई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि कोयलीबेड़ा क्षेत्र लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार उपेक्षा की जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बैंकिंग और कृषि जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपे गए, धरना-प्रदर्शन किए गए, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 2 फरवरी को हुए आंदोलन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने लिखित आश्वासन दिया था कि मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है और लोगों ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
आंदोलन के पहले दिन प्रशासन की ओर से दो एसडीएम स्तर के अधिकारी आंदोलन स्थल पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने आंदोलन समाप्त कर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक चक्काजाम जारी रहेगा।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी और प्रमुख मांग स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय को लेकर सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह विद्यालय ब्लॉक मुख्यालय कोयलीबेड़ा के नाम पर स्वीकृत हुआ था, लेकिन अब इसे पखांजूर में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। आंदोलनकारियों ने इसे कोयलीबेड़ा क्षेत्र के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि यदि विद्यालय को बाहर शिफ्ट किया गया तो यहां के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी और दूरस्थ अंचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्कूल की स्वीकृति मिली थी, इसलिए इसे कोयलीबेड़ा क्षेत्र में ही संचालित किया जाना चाहिए।
क्षेत्र में बैंकिंग सुविधा की कमी भी ग्रामीणों के आक्रोश का बड़ा कारण बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने जिला सहकारी बैंक खोलने की मांग करते हुए कहा कि किसानों और ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों होता है। किसानों ने बताया कि खाद-बीज, फसल ऋण और अन्य योजनाओं का लाभ लेने में उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है। आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि क्षेत्र में जिला सहकारी बैंक की स्थापना होती है तो किसानों को काफी राहत मिलेगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी आंदोलनकारियों ने गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि कोयलीबेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के कई पद रिक्त पड़े हैं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। विशेष रूप से महिला डॉक्टर नहीं होने से महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने अस्पताल में नया सोलर सिस्टम लगाने, रिक्त पदों को भरने और स्वास्थ्य केंद्र के लिए नए भवन की स्वीकृति देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। आंदोलनकारियों ने बताया कि क्षेत्र के कई स्कूल और आश्रम भवन जर्जर अवस्था में हैं। बारिश के दिनों में बच्चों को खतरे के बीच पढ़ाई करनी पड़ती है। कई भवनों की छतें टपकती हैं और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों ने इन भवनों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की। इसके साथ ही कोयलीबेड़ा में इसी शैक्षणिक सत्र से कॉलेज शुरू करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दूर जाना पड़ता है, जिससे गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कई छात्र आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
आंदोलन में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ब्लॉक मुख्यालय के कई कार्यालय कोयलीबेड़ा के बजाय अन्य स्थानों से संचालित हो रहे हैं, जिससे लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी भटकना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की कि ब्लॉक स्तरीय समस्त कार्यालयों का संचालन कोयलीबेड़ा से ही किया जाए ताकि लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें।
डीएमएफ राशि के उपयोग को लेकर भी आंदोलनकारियों ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाली डीएमएफ राशि का उपयोग प्रभावित गांवों में पर्याप्त रूप से नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने मांग की कि डीएमएफ राशि का शत-प्रतिशत उपयोग प्रभावित क्षेत्रों के विकास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं पर किया जाए।
सड़क निर्माण का मुद्दा भी आंदोलन का अहम हिस्सा बना हुआ है। ग्रामीणों ने कोयलीबेड़ा से अंतागढ़ मार्ग के डामरीकरण की मांग करते हुए कहा कि सड़क की हालत बेहद खराब है। बरसात के दिनों में लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीजों, छात्रों और ग्रामीणों को रोजाना परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। लोगों ने कहा कि सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से लंबित है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राजस्व संबंधी मामलों को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। आंदोलनकारियों ने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निपटारे में देरी होती है और लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसे देखते हुए कोयलीबेड़ा तहसील को अंतागढ़ अनुभाग से जोड़ने की मांग उठाई गई ताकि राजस्व मामलों का सरलीकरण हो सके और लोगों को राहत मिल सके।
आंदोलन के चलते कोयलीबेड़ा क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। आंदोलन स्थल पर लगातार ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। वहीं प्रशासन आंदोलनकारियों से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन फिलहाल कोई समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है। क्षेत्र में आंदोलन को लेकर माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की संभावना जताई जा रही है।



