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कृषि अधिकारियों के आंदोलन से आदानों की निगरानी प्रभावित, किसानों के हितों पर बढ़ी चिंता।

कृषि अधिकारियों के आंदोलन से आदानों की निगरानी प्रभावित, किसानों के हितों पर बढ़ी चिंता।

कोयलीबेड़ा । प्रदेशभर में कृषि विकास अधिकारियों तथा बीज, उर्वरक एवं कीटनाशी निरीक्षकों के आंदोलन का असर अब खरीफ सीजन की व्यवस्थाओं पर दिखाई देने लगा है। आंदोलन के कारण कृषि आदानों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने से किसानों के हितों पर संकट की आशंका जताई जा रही है। इस समय खरीफ फसलों की बुवाई और रोपाई का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है, ऐसे में बीज, उर्वरक और कीटनाशी की मांग भी बढ़ी हुई है।

जानकारी के अनुसार कृषि विभाग के निरीक्षक ही उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985, बीज अधिनियम 1966 तथा कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत निरीक्षण, नमूना संग्रहण, स्टॉक सत्यापन और वैधानिक कार्रवाई करने के लिए अधिकृत होते हैं। निरीक्षकों के आंदोलन पर रहने से इन कार्यों पर व्यापक असर पड़ा है। प्रदेशभर में लगभग 250 निरीक्षक विभिन्न विकासखंडों में पदस्थ हैं और उनके कार्य से दूर रहने के कारण नियमित जांच की प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है।

निरीक्षण नहीं होने की स्थिति में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक एवं बीज की बिक्री, स्टॉक छिपाकर रखने, अमानक या नकली सामग्री के विक्रय जैसी अनियमितताओं की आशंका बढ़ गई है। इससे किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि आदान समय पर नहीं मिलने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इसका सीधा असर खरीफ फसलों के उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।

प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में समय पर गुणवत्तायुक्त बीज, उर्वरक और कीटनाशी की उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। आंदोलन के कारण निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ने से कृषि आदानों की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

इस बीच शासन और कृषि विभाग से मांग की गई है कि कृषि विकास अधिकारियों एवं निरीक्षकों की लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर आंदोलन का समाधान किया जाए, ताकि कृषि आदानों की निगरानी फिर से सुचारु हो सके और किसानों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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