कोयलीबेड़ा क्षेत्र के स्कूलों में सरस्वती साइकिल योजना ठप्प , 125 बालिकाएँ अब भी वंचित।

कोयलीबेड़ा क्षेत्र के स्कूलों में सरस्वती साइकिल योजना ठप्प , 125 बालिकाएँ अब भी वंचित।
कोयलीबेड़ा । छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण सरस्वती साइकिल योजना का लाभ अब तक कोयलीबेड़ा क्षेत्र के स्कूलों की 125 छात्राओं को नहीं मिल पाया है। यह योजना कक्षा नवमी में पढ़ने वाली बालिकाओं को साइकिल प्रदान कर उनके स्कूल तक पहुँच को आसान बनाती है ताकि दूरस्थ गांवों में रहने वाली बेटियों की शिक्षा बाधित न हो। लेकिन शिक्षा विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह योजना कोयलीबेड़ा जैसे पिछड़े क्षेत्र में ठहर-सी गई है।
क्षेत्र के कई सरकारी हाई स्कूलों ने अब तक साइकिल प्राप्त न होने की जानकारी दी है। कोयलीबेड़ा में 37, सिकसोड़ में 18, कौड़ोसालेभाट में 13, चारगांव में 11, सुलंगी में 11, उदनपुर में 16, बढ़पारा में 11 और कड़मे में 8 बालिकाएँ इस योजना के लाभ से वंचित हैं। कुल मिलाकर 125 छात्राएँ सत्र के कई महीनों बीत जाने के बाद भी साइकिल मिलने का इंतजार कर रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। कोयलीबेड़ा क्षेत्र में कई वर्षों से खंड स्रोत कार्यालय संचालित नहीं हो पा रहा है। अधिकारी कार्यालय तक नहीं पहुँचते हैँ , जिससे योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। सरस्वती साइकिल योजना भी इन्हीं व्यवस्थागत खामियों की भेंट चढ़ती दिख रही है। यही नहीं, खंड स्रोत समन्वयक से फोन पर संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे स्थिति और स्पष्ट हो जाती है।
जिला शिक्षा अधिकारी रमेश निषाद ने स्वीकार किया कि कोयलीबेड़ा ब्लॉक में इस बार साइकिलों की संख्या कम प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही नई खेप आने वाली है, जिसमें सबसे अधिक साइकिलें कोयलीबेड़ा ब्लॉक के लिए ही होंगी और उपलब्ध होते ही वितरण प्रारंभ कर दिया जाएगा। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी देव कुमार शील ने भी यह बात मानी कि ब्लॉक को लगभग 25 प्रतिशत कम साइकिलें मिली थीं। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त मांग भेज दी गई है और जल्द ही साइकिल मिलने की संभावना है, जिसके बाद सभी बालिकाओं को वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि जब शिक्षा सत्र समाप्त होने में कुछ ही महीने बचे हैं, तब क्या इन बच्चियों के हाथों में साइकिल समय पर पहुँच पाएगी या फिर यह योजना एक बार फिर सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह जाएगी। कोयलीबेड़ा जैसे दुर्गम और पिछड़े क्षेत्र में रहने वाली बालिकाओं के लिए यह साइकिलें महज़ एक सुविधा नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा का आधार भी हैं। ऐसे में विभाग की निष्क्रियता और धीमी कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनता और अभिभावकों की निगाहें अब शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस महत्वपूर्ण योजना को वास्तविक रूप से ज़मीन पर उतार पाएंगे या नहीं।



