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कोयलीबेड़ा मे शिक्षा विभाग का खंड स्त्रोत कार्यालय वर्षों से जर्जर, उपेक्षा की भेंट चढ़ा महत्वपूर्ण भवन।

कोयलीबेड़ा: शिक्षा विभाग का खंड स्त्रोत कार्यालय वर्षों से जर्जर, उपेक्षा की भेंट चढ़ा महत्वपूर्ण भवन।

कोयलीबेड़ा। कांकेर जिले का एक महत्वपूर्ण ब्लॉक मुख्यालय, प्रशासनिक उपेक्षा की मार झेल रहा है। शिक्षा विभाग का खंड स्त्रोत कार्यालय, जो कभी क्षेत्र के शैक्षिक कार्यों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था, आज वर्षों की लापरवाही के कारण खंडहर में बदल चुका है। ऊँचे-ऊँचे झाड़ों से घिरा यह भवन अपनी पहचान और उद्देश्य दोनों खो चुका है। दीवारों का गिरना, जर्जर होते कमरे और परिसर में पसरा सन्नाटा इस बात का संकेत है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने लंबे समय से इस कार्यालय की सुध ही नहीं ली।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक भवन का जर्जर होना नहीं, बल्कि शिक्षा तंत्र की अनदेखी का प्रतीक है। कोयलीबेड़ा मुख्यालय की स्थिति तब और दयनीय हो जाती है जब यहां के अधिकांश सरकारी कार्यालयों को पखांजूर में लिंक ऑफिस के रूप में संचालित किया जाता है। इससे कोयलीबेड़ा की प्रशासनिक महत्ता लगातार कम हो रही है और क्षेत्र मुख्यालय होते हुए भी अपनी भूमिका निभाने में असमर्थ होता जा रहा है।

कोयलीबेड़ा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि लंबे समय से यह मांग उठाते रहे हैं कि सभी कार्यालयों का संचालन यहीं से हो, ताकि स्थानीय जनता को बार-बार पखांजूर की दूरी तय न करनी पड़े और ब्लॉक मुख्यालय की गरिमा भी बनी रहे। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता की कमी और लगातार हो रही अनदेखी के कारण यह मांग अभी तक अधूरी है। खंड स्त्रोत कार्यालय की खराब स्थिति इसी उपेक्षा का सजीव उदाहरण बनकर खड़ा है।

लोगों का मानना है कि जब एक इतना महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यालय ही वर्षों से बंद पड़ा रहे और उसकी मरम्मत तक की व्यवस्था न की जाए, तो यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि क्षेत्र के विकास को लेकर प्रशासन में इच्छाशक्ति की कमी है। इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था, स्थानीय कामकाज और गांवों के विकास पर पड़ता है।

कोयलीबेड़ा, जो पहले से ही कई विकास कार्यों में पिछड़ा हुआ माना जाता है, इस प्रकार की लापरवाही के चलते और भी पीछे जाता दिखाई दे रहा है। जनता और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस खंडहर बने भवन की तुरंत मरम्मत कर कार्यालय को पुनः सक्रिय किया जाए। उनका कहना है कि अगर सरकारी विभाग अपने ही भवनों और दायित्वों की देखभाल नहीं करेंगे, तो क्षेत्र विकास की राह में कैसे आगे बढ़ पाएगा।

फिलहाल, कोयलीबेड़ा का यह जर्जर खंड स्त्रोत कार्यालय प्रशासन की उदासीनता और क्षेत्र की अनदेखी का मौन साक्षी बना खड़ा है, और स्थानीय लोग एक बार फिर आशा लगाए हुए हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और इस महत्वपूर्ण कार्यालय को पुनर्जीवित किया जाएगा।

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