कोयलीबेड़ा ब्लॉक की 18 ग्राम पंचायतों में अब जल्द दिखेगा विकास.
सरपंच-सचिवों की बैठक लेकर प्रमुख समस्याओं से अवगत हुए कलेक्टर, कहा – अब क्षेत्र का निर्बाध रूप से होगा वास्तविक विकास

कोयलीबेड़ा ब्लॉक की 18 ग्राम पंचायतों में अब जल्द दिखेगा विकास
सरपंच-सचिवों की बैठक लेकर प्रमुख समस्याओं से अवगत हुए कलेक्टर, कहा – अब क्षेत्र का निर्बाध रूप से होगा वास्तविक विकास

कोयलीबेड़ा। कांकेर जिले के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्र कोयलीबेड़ा में अब विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जगी है। माओवाद प्रभावित क्षेत्र रहे इस इलाके में प्रशासन अब बुनियादी सुविधाओं और विकास योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने की तैयारी में है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने कोयलीबेड़ा पहुंचकर 18 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और सचिवों के साथ विस्तृत बैठक ली तथा क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली।
कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय स्थित पीएमश्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान ग्राम पंचायत कोयलीबेड़ा, सुलंगी, कडमे, झिरमतराई, तुरसानी, छोटेबोदली, पोरोंडी, केसेकोड़ी, उदनपुर, सिकसोड़, चारगांव, आलपरस, गुडाबेड़ा, कौड़ोसाल्हेभाट, दड़वी साल्हेभाट, पानीडोबीर, कामटेरा और बदरंगी पंचायतों के प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से क्षेत्र की समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रखीं।
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि क्षेत्र में आज भी कई गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों ने पुलिया और सीसी रोड निर्माण, जर्जर स्कूल भवनों के स्थान पर नए भवन निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र भवन, स्वास्थ्य केंद्र भवन, पीडीएस सेंटर, छात्रावास भवन, सोलर लाइट, बाउंड्रीवॉल, खेल मैदान, बोर खनन तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं की मांग की। बैठक के दौरान कलेक्टर ने इन सभी मांगों को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के सीईओ श्री उदय नाग को आवश्यक निर्माण कार्यों की विस्तृत सूची तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
इस दौरान कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने कहा कि माओवाद की समाप्ति के बाद अब कोयलीबेड़ा क्षेत्र में विकास कार्यों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, “अब समय क्षेत्र के वास्तविक विकास का है। शासन की मंशा है कि दूरस्थ गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचें। जनप्रतिनिधियों द्वारा जो मांगें रखी गई हैं, उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”
दौरे के दौरान कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक लेकर विभिन्न निर्माण कार्यों और योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों में लापरवाही न बरती जाए और समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण किए जाएं। कलेक्टर ने यह भी कहा कि 18 पंचायतों में आवश्यक निर्माण कार्यों की स्वीकृति जल्द देने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोयलीबेड़ा का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, बिजली व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली गई। उन्होंने अस्पताल में सोलर सिस्टम की मरम्मत जल्द कराने तथा स्वीकृत नए भवन निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कोयलीबेड़ा तहसील अंतागढ़ अनुभाग के अंतर्गत होने के बावजूद कई प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को पखांजूर जाना पड़ता है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी होती है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि तहसील से जुड़े सभी प्रशासनिक कार्य अंतागढ़ अनुभाग से संचालित किए जाएं तथा जनपद पंचायत से संबंधित सभी कार्यालयों का संचालन कोयलीबेड़ा मुख्यालय से सुनिश्चित किया जाए।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के कई स्कूल भवन जर्जर हो चुके हैं, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं किसानों ने कोयलीबेड़ा में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की स्थापना की मांग रखी। किसानों का कहना था कि बैंक सुविधा के अभाव में उन्हें अंतागढ़ जाना पड़ता है, जहां सप्ताह में केवल एक दिन लेन-देन हो पाता है।
“बस्तर मुन्ने” और “सुशासन तिहार” के दौरान हुए इस कार्यक्रम को क्षेत्र के लोग प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बेहतर संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मान रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि इस दौरे के बाद लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।



