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जनजातीय गौरव दिवस पर कोयलीबेड़ा अंचल में हुए विभिन्न आयोजन। भगवान बिरसा मुंडा की 150 वी जयंती।

जनजातीय गौरव दिवस पर कोयलीबेड़ा अंचल में हुए विभिन्न आयोजन।

कोयलीबेड़ा। आदिवासी जन चेतना के लोकनायक भगवान बिरसा मुंडा की 15 नबंवर को 150वीं जयंती मनाई गई । इसे जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है । बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर कोयलीबेड़ा अंचल में पँचायतों व सामाजिक भवनों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गए।
जिरामतरई सरपंच हेमा हुपेंडी ने बताया कि वर्ष 2021 में, केंद्र सरकार ने 15 नवंबर, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया। इसका उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सम्मान देना है। अपनी परंपराओं और गौरवपूर्ण इतिहास को स्वीकार करते हुए पूर्वजों के अदम्य साहस को नमन करने का जो अवसर हमे मिला है यह सराहनीय है।

बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन के बारे में किया जागरूक –

सरपंचों ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जननायक थे, उन्होंने आदिवासी समुदाय को जल, जंगल, जमीन के बारे में जागरूक किया और उन्हें अपने हक की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा दी। सरपंचों ने कहा कि बिरसा मुंडा जी ने तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य की नीतियों का विरोध किया और आदिवासियों की सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए जीवन भर काम किया। उनके क्रांतिकारी विचार और देश प्रेम की भावना आज भी हम सभी को प्रेरित करती है।

पँचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। भगवान बिरसा मुंडा जी से प्रेरणा लेकर हमारा प्रदेश आगे बढ़े और विकास के पथ पर सतत अग्रसर रहे, इस के लिए प्रयास हम सभी को मिलजुलकर करना होगा।

इस दौरान कोयलीबेड़ा,जिरामतर ई,सिकसोड़,कोड़ोसालेभाट,पानीडोबीर, केसेकोड़ी, आलपरस, सुलंगी व अंचल के समस्त के पँचायत भवनों के साथ ही कोयलीबेड़ा सर्व आदिवासी समाज भवन में भगवान बिरसा मुंडा को नमन किया गया।

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