अबूझमाड़ के बिनागुंडा में बदली तस्वीर, आजादी के बाद पहली बार पहुंचे कांकेर सांसद भोजराज नाग

अबूझमाड़ के बिनागुंडा में बदली तस्वीर, आजादी के बाद पहली बार पहुंचे कांकेर सांसद भोजराज नाग
कोयलीबेड़ा। अबूझमाड़ के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे बिनागुंडा गांव में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसे क्षेत्र में बदलाव की नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग मोटरसाइकिल से बिनागुंडा पहुंचे। इस दौरान उनके साथ स्थानीय प्रशासन की टीम भी मौजूद रही और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण अलग-थलग रहे इस इलाके में प्रशासनिक पहुंच का एक नया संदेश गया।
बिनागुंडा कभी माओवादियों के सबसे प्रभावशाली इलाकों में गिना जाता था। अबूझमाड़ के इस हिस्से में घने जंगल, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और नक्सली गतिविधियों के कारण आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहुंच भी सीमित रही। सुरक्षा कारणों से वर्षों तक इस क्षेत्र में बड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का दौरा नहीं हो पाता था। यही वजह रही कि बिनागुंडा लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर बना रहा।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद क्षेत्र में परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। अबूझमाड़ के कई इलाकों में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बनाने के प्रयास तेज हुए हैं। सांसद भोजराज नाग का बिनागुंडा पहुंचना इसी बदलते माहौल की एक महत्वपूर्ण तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है।
सांसद ने गांव पहुंचकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की और क्षेत्र की परिस्थितियों को करीब से समझा। उनके दौरे के दौरान ग्रामीणों में भी उत्सुकता दिखाई दी। लंबे समय बाद किसी बड़े जनप्रतिनिधि के गांव तक पहुंचने को स्थानीय लोग क्षेत्र के विकास और सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद से जोड़कर देख रहे हैं।
दौरे के दौरान सांसद भोजराज नाग ने माओवादी हिंसा के शिकार मनेश नूरुटी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। स्थानीय जानकारी के अनुसार, मनेश नूरुटी ने गांव में तिरंगा झंडा फहराया था, जिसके बाद माओवादियों द्वारा उनकी हत्या किए जाने की घटना सामने आई थी। सांसद द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि देना क्षेत्र में शांति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के संदेश के रूप में देखा गया।
बिनागुंडा में सांसद की यह मौजूदगी केवल एक दौरा नहीं, बल्कि उस इलाके में बदलते हालात का संकेत मानी जा रही है, जहां कभी सुरक्षा चुनौतियों के कारण पहुंचना मुश्किल था। अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की बढ़ती सक्रियता से उम्मीद की जा रही है कि अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो सकेगा।



