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तेंदूपत्ता तोड़ाई के भुगतान में देरी: किसानों की आजीविका पर संकट- रवि दुग्गा

*तेंदू पत्ता तोड़ाई के भुगतान में देरी: किसानों की आजीविका पर संकट- रवि दुग्गा*

भानुप्रतापपुर । वर्तमान में खेती-किसानी का सीजन अपने चरम पर है, और किसान अपनी मेहनत से फसल तैयार करने में जुटे हुए हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण समय में, तेंदू पत्ता संग्रहण का कार्य पूरा होने के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, तेंदू पत्ता तोड़ने वाले किसानों और मजदूरों को उनका मेहनताना नहीं मिला है। यह स्थिति न केवल अत्यंत चिंताजनक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका के लिए गंभीर संकट पैदा कर रही है। और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करता है।तेंदू पत्ता संग्रहण, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में, हजारों परिवारों के लिए आय का एक प्रमुख स्रोत है। इस कार्य पर निर्भर किसान और मजदूर अपनी दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए इस आय पर निर्भर रहते हैं। लेकिन भुगतान में हो रही देरी के कारण ये परिवार आर्थिक तंगी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों की लापरवाही और उदासीनता ने किसानों के बीच भारी आक्रोश पैदा किया है। यह स्थिति न केवल किसानों के अधिकारों का हनन है, बल्कि उनकी मेहनत और श्रम का अपमान भी है। तेंदू पत्ता संग्रहण एक श्रमसाध्य कार्य है, जिसमें किसान और मजदूर कठिन परिस्थितियों में जंगलों में जाकर पत्ते एकत्र करते हैं। इसके बावजूद, उनकी मेहनत का उचित मूल्य समय पर न मिलना अन्यायपूर्ण है। यह देरी न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करती है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और विश्वास को भी ठेस पहुंचाती है।
वन सभापति की मांगें:
1. तेंदू पत्ता तोड़ाई का बकाया भुगतान तत्काल प्रभाव से सभी पात्र किसानों और मजदूरों के बैंक खातों में जमा किया जाए।
2. भविष्य में ऐसी देरी से बचने के लिए एक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह भुगतान प्रणाली स्थापित की जाए।
3. भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जांच की जाए और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।तेंदू पत्ता संग्रहण से जुड़े किसानों और मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो।
शीघ्र ही उपरोक्त मांगें पूरी नहीं की गईं, तो बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगें । सभी किसानों, मजदूरों और ग्रामीण समुदायों से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर अपने हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। इस संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े है।उम्मीद करता हुँ कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और किसानों की मेहनत का उचित सम्मान करते हुए तत्काल भुगतान सुनिश्चित करेगा।

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