छत्तीसगढ़

स्वामी आत्मानन्द स्कूल कोयलीबेड़ा में बसन्त पंचमी और मातृ पितृ पूजन दिवस पर हुए विविध आयोजन।

स्वामी आत्मानन्द स्कूल कोयलीबेड़ा में बसन्त पंचमी और मातृ पितृ पूजन दिवस पर हुए विविध आयोजन।

कोयलीबेड़ा। आज बुधवार को स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी केआर सिन्हा के निर्देशानुसार स्वामी आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम स्कूल कोयलीबेड़ा में माघ मास शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को बसंत पंचमी एवं मातृ पितृ दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना व सरस्वती वंदना सेजेस के विद्यार्थियों सहित उपस्थित अतिथियों द्वारा किया गया। अनोखी पूजा थाल सजाए बच्चों ने अपने माता-पिता के चरण स्पर्श कर गुरुओं से भी आशीर्वाद लिया और पीत पुष्प भेट किया गया साथ ही बच्चों द्वारा बनाये हुए विभिन्न जागरूकताओं को दर्शाता रंगोली सभी को बहुत ही अच्छा लगा।
शाला समिति के सदस्य पालक हरि प्रसाद निषाद ने कहा कि मंजिलों से कुछ नहीं होता हौसलों में उड़ान होती है। आप सभी खूब मेहनत से पढ़ाई कीजिये निश्चित ही मंजिल आपकी कदम चूमेगी। साथ ही पवन वड्डे, श्रवण यादव ने भी कहा की यह विद्यारंभ का विशेष मुहूर्त है एवं बच्चों का उत्साह सराहनीय है। बच्चों को आज जो संस्कार मिलेंगे वही उनकी भावी भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी और आगे चलकर ये बच्चे राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे।

प्रधानाध्यापक आरआर हिड़को ने शुभकामनाएं देते हुए कहा की माता पिता ही बच्चो के प्रथम गुरु है। उनका सम्मान सबसे पहले बनता है आज बसन्त पंचमी के साथ ही मातृ पितृ पूजन दिवस मनाया जा रहा है बच्चों को संस्कारवान बनाने की ओर एक अभिनव पहल कही जा सकती है, ये संस्कारी बच्चे देश के भविष्य हैं जो आगे चलकर अच्छी पढ़ाई के बल पर देश व क्षेत्र का नाम अवश्य ही रौशन करेंगे।
वहीं कार्यक्रम का संचालन कर रहे शिक्षक खुमन साहू ने वसंत को ऋतुओं का राजा बताते हुए इस ऋतु की कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जो सबको प्रभावित किया।
आभार प्रदर्शन शिक्षिका सोनल सिंह के द्वारा किया गया ।इस अवसर पर शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों हरि निषाद, हेमा हुपेंडी,पवन वड्डे, पूनम उइके,शिक्षक गण में आरआर हिड़को, सुनील साहू, खुमन साहू,पारख दास साहू,लीना साहू,वंदना शोरी,परमानंद कश्यप,अपूर्व विश्वकर्मा, सोना मरकाम, सोनल सिंह, चंचल सिन्हा, संदीप सरकार, वसुधा शर्मा, इशिका पटेल आदि मौजूद रहे।

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