वीर गुण्डाधुर के आदर्शों पर चलकर जल ,जंगल और जमीन की रक्षा का लिया संकल्प।

वीर गुण्डाधुर के आदर्शों पर चलकर जल ,जंगल और जमीन की रक्षा का लिया संकल्प

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कोयलीबेड़ा। वीर गुण्डाधुर की 114 वी जयंती पर कोयलीबेड़ा में सर्व समाज के बैनर तले महान भूमकाल दिवस मनाया गया इस दौरान बाजार स्थल पर क्षेत्र के 97 गांवो के हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को अपने हक अधिकार से लेकर विभिन्न जानकारियां भी दी गयी । समाज प्रमुखों ने भूमकाल स्मृति दिवस पर आदिवासी जननायक अमर बलिदानी गुंडाधुर को नमन किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के जल, जंगल व जमीन के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का आगाज करने वाले नायक गुंडाधुर का बलिदान इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।
सभा को सम्बोधित करते हुए अधिकतर वक्ताओं ने कहा कि 10 फरवरी 1910 में बस्तर के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका था। इस विरोध को बुलंद करने में आदिवासी जननायकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। इन्हीं जननायकों में से अमर बलिदानी गुंडाधुर के नेतृत्व में भूमकाल विद्रोह में आदिवासियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ डटकर संघर्ष किया। उनकी याद में छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से प्राचीन दंडकारण्य क्षेत्र के स्थानीय लोग हर साल भूमकाल दिवस मनाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आदिवासी चेतना के प्रतीक के रूप में शहीद गुंडाधुर जनमानस में हमेशा जीवित रहेंगे। उनकी स्मृति में मनाया जाने वाला भूमकाल दिवस सदा हमें शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करने का साहस देता रहेगा। वक्ताओं ने कहा कि अमर शहीद गुंडाधुर ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी जनमानस में जो अलख जगाई है, वह हमेशा प्रज्ज्वलित रहेगी। इस दौरान 97 गांवो के पटेल, गायता,सामाजिक कार्यकर्ता,जनप्रतिनिधियों के अलावा ग्रामीण मौजूद रहे।



