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अल्प वर्षा की स्थिति में कृषि कार्य हेतु समसामयिक सलाह

कांकेर जिले में अल्प वर्षा की स्थिति को देखते कृषि विभाग के उप संचालक द्वारा सीधी बुआई किये हुए खेत में बियासी नहीं करके इसके स्थान पर पाटा चलाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि रोपाई नहीं किये हुए नर्सरी, थरहा की अवधि 30 से 35 दिन से अधिक होने पर कृषक धान के थरहा को ऊपर से आधा काटने के बाद एक स्थान पर 3 से 4 पौधों की रोपाई करें।
अल्प वर्षा की स्थिति में उच्चहन धान के खेत में कम नमी को देखते हुये यूरिया का सीधे फसल में छिड़काव के स्थान पर यूरिया का 2-2 प्रतिशत का घोल तैयार कर धान की खड़़ी फसल में छिड़काव किया जाए। सिंचाई उपलब्ध होने के स्थिति में फसल सुरक्षा के हिसाब से आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। मृदा में नमी को लम्बे समय तक सुरक्षित करने के लिए खड़ी फसल में हाथ के द्वारा खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए। जल के धीरे-धीरे रिसाव के लिए खेत के किनारे में छोटा सा डबरी का निर्माण करें, जिसमें 1 क्यूबिक मीटर जल संग्रहित हो। धान के मध्यम भूमि में खेत में नमी सुरक्षित करने के लिए खेत के ऊपर एवं नीचे की ओर नाली बनायें। रोपा किये गये खेत में निंदानाशक दवाई का दो बार छिड़काव क्रमशः फेनोक्सोप्रोपईथाइल 60 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर, इथाक्सीसल्जयूरान 15 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर खरपतपार की दो-तीन पत्ती अवस्था पर या फसल बुवाई के 18-20 दिन बाद एवं उसके बाद बिस्पायरीबिक सोडियम  20 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर बोनी के 30-35 दिन बाद छिड़काव किया जाए।

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