सांस्कृतिक श्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र,दिल्ली में कांकेर जिले के दो शिक्षकों का प्रशंसनीय प्रदर्शन।

सांस्कृतिक श्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र,दिल्ली में कांकेर जिले के दो शिक्षकों का प्रशंसनीय प्रदर्शन।
कांकेर।
सांस्कृतिक स्तोत्र एवं प्रशिक्षण केंद्र,नई दिल्ली में “रोल ऑफ म्यूजियम इन स्कूल एजुकेशन” के पांच दिवस के प्रशिक्षण राज्य समग्र शिक्षा के आदेश अनुसार छत्तीसगढ़ से 6 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। जिसमे कांकेर जिले से प्रतिनिधत्व करते हुए रीना सिदार, व्याख्याता अमोडी विकासखंड अंतागढ़ , व श्री कमलेश देवांगन सहायक शिक्षक उदनपुर विकासखंड कोयलीबेड़ा,कांकेर, ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहनो एवं पोशाक पहन कर अपनी टीम के शिक्षक सोना सिंह व्या.कोटेया, सूरजपुर , पूर्णेश डडसेना शिक्षक चंगोरा भाटा पूर्व ,प्रमोद कुमार पाल सहा. शिक्षक ,गोडही, दुर्ग टोमन लाल भूआर्य सहा. शिक्षक बिरेतरा, बालोद से साथ मिलकर प्रेजेंटेशन दिया गया। इस पांच दिवस के प्रशिक्षण में सीसीआरटी नई दिल्ली के उपसंचालक श्री राहुल कुमार सर के द्वारा प्रथम दिवस म्यूजियम के कॉन्सेप्ट पर कैसे कार्य करें और इसे कैसे स्कूल एवं कक्षा तक ले जाएं इस प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या है? तथा नई शिक्षा नीति का यह किस तरह से हिस्सा बना हुआ है। इस बारे में विस्तृत एवं ऊर्जावान व्याख्यान दिया गया इसके साथ ही श्री देवनारायण रजक सर एवं वीना मैडम के द्वारा हमें पूरे 5 दिवस के शेड्यूल पर चर्चा की गई एवं संग्रहालय भ्रमण पर सहयोग प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के दूसरे और तीसरे दिवस क्रमशः नेशनल म्यूजियम एवं क्राफ्ट म्यूजियम का भ्रमण कराया गया साथ में कार्यशाला में सभी साथियों के द्वारा समूह में संग्रहालय के ऑडिटोरियम में प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस दौरान संग्रहालय में श्री राजेंद्र सर एवं शिबा मैडम हमारा मार्गदर्शन करती रही। नेशनल म्यूजियम एवं क्राफ्ट म्यूजियम का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने जाना कि इसे हम इतिहास के साथ-साथ विज्ञान गणित एवं अन्य विषयों से जोड़कर अपनी परंपरा संस्कृति और सभ्यता को संरक्षित रख सकते हैं। साथ ही अलग-अलग राज्यों के देश के रहन-सहन देशकर मौसम स्थिति वहां के रोजगार के विषय को भी समझ और जान सकते हैं।इस प्रशिक्षण में अतिथि के रूप में डॉ. भार्गवी के द्वारा कैसे म्यूजियम तैयार करें और किस तरह से हम म्यूजियम का रखरखाव करें कैसे बच्चों को म्यूजियम का वर्चुअल टूर काराये। इस विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया। प्रशिक्षण के चतुर्थ दिवस पर डॉ. मगेश के द्वारा बायोडायवर्सिटी विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया तथा पशु पक्षी मनुष्य एक साथ कैसे जीवन जीते हैं इस पर रोचक व्याख्यान दिया गया। तथा दूसरे सत्र में डॉ.राधिका धूमिल जी संग्रहालय के संरक्षण पर कैसे कार्य करें किलो का भ्रमण कैसे करें कैसे बच्चों को प्रोजेक्ट वर्क के द्वारा म्यूजियम से जोड़ें इस पर कई तरह से उदाहरण दिए गए किस तरह से हम बच्चों को अपने गांव,जिले, राज्य और देश के सभ्यता संस्कृति, परंपरा एवं इमारतों के पीछे छुपी कहानियां से जोड़ सकते हैं।प्रशिक्षण के अंतिम दिवस सभी 11 राज्यों के 72 प्रतिभागियों के द्वारा म्यूजियम कांसेप्ट को लेकर सहायक संचालक सीआरटी श्री ऋषि वशिष्ठ कर के समक्ष प्रेजेंटेशन दिए गए। उनके द्वारा यह कहां गया कि स्कूल में म्यूजियम का एक कोना जरूर बनाएं और म्यूजियम कांसेप्ट को लेकर बच्चों के साथ कार्य करते हुए हमें फीडबैक आवश्यक रूप से दें। प्रशिक्षण में सभी प्रशिक्षणार्थियों को म्यूजियम के निर्माण के लिए किट भी प्रदान किया गया।अंत में सिद्धि समारोह का आयोजन करते हुए पांच दिवस के प्रशिक्षण के पश्चात सीसीआरटी के संचालक आदरणीय श्री ऋषि वशिष्ठ सर के द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर कार्यक्रम का समापन किया गया। प्रशिक्षण में सम्मिलित होने के लिए के प्रधान पाठक एवं समस्त स्टाफ ने ढेर सारी बधाई दी।



