कोयलीबेड़ा के युवा कृषक अंकुश पटेल बने मिसाल, खेती से संवार रहे परिवार और भविष्य।

कोयलीबेड़ा के युवा कृषक अंकुश पटेल बने मिसाल, खेती से संवार रहे परिवार और भविष्य।

कोयलीबेड़ा। कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय के युवा कृषक अंकुश पटेल आज क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बनते जा रहे हैं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने खेती को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि अपने परिवार के भविष्य को संवारने का माध्यम बना लिया है। रबी और खरीफ दोनों ही सीजन में धान और मक्का की खेती कर वे अच्छी उपज ले रहे हैं, वहीं घर की बाड़ी में जैविक पद्धति से सब्जियों का उत्पादन कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं।
अंकुश पटेल के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब पिता के स्वर्गवास के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। खेती-किसानी की जिम्मेदारी के साथ परिवार की देखभाल का दायित्व भी उन्हें संभालना पड़ा। यह समय उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया। पूरी तन्मयता और समर्पण के साथ उन्होंने खेती को अपनाया और आज उसी के बल पर अपने जीवन को नई दिशा दी है।
अंकुश बताते हैं कि उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने रोजगार की तलाश में कई प्रयास किए, लेकिन कहीं भी सफलता नहीं मिली। इसी बीच उनके किसान पिता की तबीयत लगातार खराब रहने लगी, जिससे घर और खेती दोनों की स्थिति प्रभावित होने लगी। ऐसे समय में उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे खेती को ही अपना मुख्य कार्य बनाएंगे। उन्होंने सोचा कि यदि खरीफ और रबी दोनों सीजन में नियमित रूप से फसल ली जाए, तो परिवार के लिए स्थायी आय का स्रोत तैयार किया जा सकता है।
शुरुआत में खेती के काम में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। अनुभव की कमी, संसाधनों की सीमित उपलब्धता और मौसम की अनिश्चितता जैसी चुनौतियाँ सामने थीं, लेकिन सीखने की इच्छा और मेहनत के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे खेती की सही दिशा पकड़ ली। आज वे खरीफ सीजन में धान और रबी सीजन में मक्का की सफल खेती कर रहे हैं। इस समय उनकी मक्के की फसल खेतों में तैयार होने की स्थिति में है और जल्द ही उसकी कटाई शुरू होगी।
खेती से मिली सफलता ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। खेती की आमदनी से उन्होंने ट्रैक्टर खरीदा, जिससे खेती के कार्य आसान हुए और लागत भी कम हुई। साथ ही वे अपने पक्के मकान का सपना भी साकार कर रहे हैं। यह सब उनकी मेहनत, अनुशासन और खेती के प्रति समर्पण का परिणाम है।
अंकुश पटेल का मानना है कि खेती में केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही प्रबंधन भी बहुत जरूरी है। वे बताते हैं कि सिंचाई की उचित व्यवस्था और खाद प्रबंधन फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। घर की बाड़ी में सब्जियों की खेती वे पूरी तरह जैविक तरीके से करते हैं और उसमें रासायनिक खाद का बिल्कुल उपयोग नहीं करते। धान और मक्का की फसल में भी वे बहुत कम मात्रा में रासायनिक खाद का प्रयोग करते हैं, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन भी बेहतर हो।
उनके कृषि कार्य में परिवार की बहनों का भी पूरा सहयोग रहता है। खेतों में वे बराबरी से हाथ बंटाती हैं और खेती को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परिवार का यह सहयोग ही अंकुश की सबसे बड़ी ताकत है, जिसके सहारे वे हर चुनौती का सामना कर रहे हैं।
आज अंकुश पटेल न केवल अपने पैतृक जमीन का बेहतर उपयोग कर रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी खेती की ओर प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि मेहनत और लगन के साथ खेती की जाए, तो यह किसी भी नौकरी से कम नहीं है। आत्मनिर्भरता, सम्मान और स्थायी आय—तीनों खेती से प्राप्त किए जा सकते हैं। कोयलीबेड़ा के इस युवा कृषक की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।



