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हाई स्कूल उदनपुर में शिक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण, रविवार को भी लगती हैं कक्षाएं.

हाई स्कूल उदनपुर में शिक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण, रविवार को भी लगती हैं कक्षाएं

कोयलीबेड़ा। शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण और नवाचार का मिसाल बन चुका हाई स्कूल उदनपुर लगातार अपनी मेहनत और अनुशासन से नई पहचान बना रहा है। विद्यालय में शिक्षकों द्वारा नियमित कार्यदिवसों के साथ-साथ रविवार को भी विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है, ताकि उनके अध्ययन में किसी प्रकार की कमी या शंका न रह जाए। यह पहल पिछले तीन से चार वर्षों से लगातार जारी है और इसी का परिणाम है कि विद्यालय का परीक्षा परिणाम लगातार शत-प्रतिशत बना हुआ है।

विद्यालय के प्राचार्य दिनेश्वर बघेल ने बताया कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और परिणामों में निरंतरता बनाए रखने के लिए यह निर्णय शाला प्रबंधन समिति एवं पालकों की सहमति से लिया गया था। इस पहल के तहत हर रविवार को शिक्षकों द्वारा अलग-अलग विषयों की पुनरावृत्ति, कठिन प्रश्नों का समाधान और परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष अभ्यास कराया जाता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और निरंतर परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। विद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही अत्यंत लगनशील हैं, जिसके चलते बीते कुछ वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ स्थानीय परीक्षाओं में भी विद्यालय ने लगातार शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त किए हैं। प्राचार्य बघेल ने यह भी बताया कि रविवार को कक्षाएं लगाने का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम सुधारना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति जिम्मेदारी, आत्मअनुशासन और आत्मविश्वास की भावना विकसित करना भी है।

विद्यालय में इस नवाचार को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है।

धनाजु कोवाची, ग्राम के अभिभावक प्रतिनिधि ने कहा, “हमारे गाँव में पहले बच्चे रविवार को पढ़ाई से दूर रहते थे, लेकिन अब वे खुद स्कूल जाने को उत्सुक रहते हैं। शिक्षकों का यह प्रयास वाकई सराहनीय है।”

किशोर कोवाची, पालक सदस्य ने बताया, “विद्यालय में इस तरह की व्यवस्था से बच्चों में पढ़ाई के प्रति गंभीरता बढ़ी है। परिणाम भी लगातार अच्छे आ रहे हैं, जिससे पूरे गाँव का मान बढ़ा है।”

गणेश दुग्गा , स्थानीय युवा ने कहा, “रविवार को भी शिक्षा देने की यह पहल दिखाती है कि हमारे शिक्षक कितने समर्पित हैं। यह कदम आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।”

वहीं रजऊ राम उसेंडी, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य ने कहा, “विद्यालय के शिक्षकों और प्राचार्य का यह सामूहिक प्रयास ही है कि पिछले कई वर्षों से शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी शिक्षा व्यवस्था बहुत कम देखने को मिलती है।”

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि आने वाले वर्षों में भी इस परंपरा को बनाए रखते हुए और अधिक सृजनात्मक तरीकों से शिक्षा के स्तर को ऊँचाई पर पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा। कोयलीबेड़ा जैसे ग्रामीण अंचल में हाई स्कूल उदनपुर का यह प्रयास शिक्षा के प्रति समर्पण और सामूहिक सहयोग की मिसाल बन गया है।

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