लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने सायकिल से भारत भ्रमण पर निकला हरियाणा का युवक
अब तक 16 राज्यों की कर चुका यात्रा,सबसे ऊंची सड़क पर साइकिल चलाना चाहते हैं अजय।

लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने सायकिल से भारत भ्रमण पर निकला युवक।
सालभर पूर्व साइकिल से भारत ‘भ्रमण पर निकला युवा अब तक 16 राज्यों की कर चुका यात्रा
, बीच पड़ाव में पहुंचे अंतागढ़..
अन्तागढ़। हरियाणा के खेड़ी सिंबलवाली निवासी 21 वर्षीय युवा अजय कुमार 10 दिसंबर 2022 से पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर साइकिल से भारत भ्रमण करते हुए 12 ज्योतिलिंग की यात्रा पर निकले हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लोगों को दे रहे हैं। साल भर में वे 16 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। अब तक की यात्रा में वे लगभग 15 हजार किमी साइकिल से नाप चुके हैं। आज उनका सायकल यात्रा 1 साल और 8 दिन पूरा हो चुका है उनकी आगे की यात्रा यहां से दंतेवाड़ा फिर तेलंगाना राज्य जाने की बात बताया । अपनी यात्रा के अब तक के अनुभव को लेकर उनका मानना है कि 90 प्रतिशत लोगों को पर्यावरण से कोई मतलब नहीं है। वे अपने हिसाब से चीजों को इस्तेमाल करते हैं, इसे लेकर उन्होंने चिंता जाहिर की। उनका मानना है कि पर्यावरण के प्रति सचेत होने की आवश्यकता है इसका दुष्प्रभाव लोगों के जीवन के लिए हानिकारक है । ग्लोबल वार्मिंग की बात सभी को पता चल चुकी है फिर भी लोग लगातार पर्यावरण को नुकसान पहुचाने पर आमादा हैं। सभी से अपील है कि कम से कम ईंधनों का प्रयोग करें और कम दूरी की यात्रा पर साइकिल का इस्तेमाल करें। इससे सेहत और पर्यावरण दोनों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
*घरवालों को बताए बिना निकल गया*
अजय ने अपनी यात्रा के दौरान मिडिया से चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने 2020 में कश्मीर से कन्या कुमारी तक यात्रा करने का सोचा था जो पूरा नहीं हुआ। फिर उन्होंने तय किया कि वे भारत के सभी राज्यों में साइकिल से सफर कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर जाएंगे। इस दौरान 12 ज्योतिलिंग का दर्शन भी करेंगे। बीएससी तक की शिक्षा प्राप्त अजय अपने माता पिता के इकलौते पुत्र है। उनके अलावा उनकी एक बहन भी है। वे हिमाचल जाने के नाम पर घर से निकले थे। यात्रा के 7 दिनों बाद उन्होंने बताया कि वे साइकिलिंग कर रहे घरवालों के पूछने पर कहा 1-2 माह में लौट आएंगे। ऐसा करते करते साल गुजर जाने के बाद अब सब समान्य हो गया है घर वालों से लगभग रोज बात होती है।
*दो बार एक्सीडेंट हुआ, बुखार भी रहा, फिर भी नहीं टूटा हौसला*
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान उनका दो बार एक्सीडेंट हुआ। इसमें एक घटना में बाल बाल बचे। दूसरी बार में कुछ चोटें भी आई, फिर भी 400 किमी तक साइकिल चलाया,फिर अपने मामा के पास जाकर जख्म ठीक होने तक रुकने के बाद फिर यात्रा पर निकल पड़े। तीन बार उन्हें बुखार भी आया, इसमें दो बार बुखार उतरने तक विश्राम किया। एक बार बुखार हालात में भी साइकिलिंग जारी रखा। इसके अलावा और भी कई चुनौतियां आई, फिर भी हौसला नहीं टूटा। यात्रा के दौरान कई जगहों पर लोग भोजन को व्यवस्था कर देते हैं। लोगों से नहीं मिलने पर खुद भी व्यवस्था करना पड़ता है। कई बार ऐसा भी आया जब रास्ते होटल नहीं मिलने पर पूरा दिन पास रखे नमकीन खाकर रहना पड़ा। शाकाहारी होने की वजह से भी उन्हें कई बार दिक्कत होती है।
*दुनिया की सबसे ऊंची सड़क पर जाने का लक्ष्य*
अजय का कहना कि यात्रा के दौरान उनका लद्दाख में समुद्र तल से 19300 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची सड़क उमलिंग ला जाना चाहते हैं। उनकी यह यात्रा दिसंबर 2024 तक पूरी हो जाने की उम्मीद है।
*प्रतिदिन चलाते हैं 100 किमी साइकिल*
अपनी अब तक की यात्रा में वे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पं. बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेचालय, मणिपुर, झारखंड, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेश के सरपट मैदान से लेकर पहाड़ी एवं जंगल के रास्तों को साइकिल से नाप चुके हैं। प्रतिदिन में औसतन 90 से 100 किमी साइकिल चलाते हैं। वे रोज सुबह 8 से शाम को दिन इलने तक यात्रा करते हैं। एक दिन में अधिकतम उन्होंने 150 किमी की दूरी तय की है।
अंतागढ़ पहुंचने पर नगर के कुछ जनप्रतिनिधि व मिडिया साथी तथा कुछ युवाओं से मुलाकात हुई उन्होंने अंतागढ़ के लोग की सराहना करते हुए कहा कि यहां के लोग बहुत ही सरल व व्यवहारिक हैं। संध्या होने की वजह से नगर में ही उनके रूकने व भोजन की व्यवस्था की गई । जिसमें नगर पंचायत उपाध्यक्ष अमल नरवास शिक्षक राकेश शुक्ला, गोलू महावे व मिडिया साथियों का योगदान रहा।



