राजधानी से मिली प्रेरणा, केसेकोड़ी में बना बेटियों के लिए आधुनिक शौचालय.
आदिवासी महिला सरपंच फूलबती उसेंडी की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना, वीबीजी रामजी.योजना के तहत प्रदेश का पहला आधुनिक बालिका शौचालय.

*राजधानी से मिली प्रेरणा, केसेकोड़ी में बना बेटियों के लिए आधुनिक शौचालय*
*आदिवासी महिला सरपंच फूलबती उसेंडी की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना, वीबीजी रामजी* *योजना के तहत प्रदेश का पहला आधुनिक बालिका शौचालय*

उत्तर बस्तर कांकेर, 24 सितंबर 2026/ कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत केसेकोड़ी में बना बालिका शौचालय इन दिनों सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि एक महिला सरपंच की सोच और पहल की कहानी बन गया है। दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र की आदिवासी महिला सरपंच फूलबती उसेंडी ने राजधानी प्रवास के दौरान देखी आधुनिक शौचालय की सुविधा से प्रेरणा ली और तय किया कि उनके गांव की बेटियों को भी ऐसी ही सुविधा मिलनी चाहिए।
फूलबती उसेंडी बताती हैं कि राजधानी जाने के दौरान उन्होंने आधुनिक तरीके से बनाए गए शौचालय और उसमें उपलब्ध सुविधाओं को देखा था। वहीं से उनके मन में विचार आया कि जब शहरों में बेटियों के लिए बेहतर और सुविधाजनक शौचालय बनाए जा सकते हैं, तो उनके गांव में भी ऐसी सुविधा क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने लौटकर पंचायत में इस बात को रखा। सवाल सिर्फ शौचालय बनाने का नहीं था, बल्कि ऐसा शौचालय बनाने का था जिसे देखकर गांव की बेटियों को भी लगे कि उनके लिए कुछ खास सोचा गया है।
*‘रायपुर में देखा तो लगा, हमारे गांव की बेटियों के लिए भी ऐसा होना चाहिए’*
सरपंच फूलबती उसेंडी के मुताबिक, “मैं राजधानी रायपुर गई थी। वहां आधुनिक शौचालय देखा तो मुझे लगा कि हमारे गांव की बेटियों को भी ऐसी सुविधा मिलनी चाहिए। फिर हमने सोचा कि सामान्य शौचालय बनाने के बजाय ऐसा शौचालय बनाया जाए, जो साफ-सुथरा, सुविधाजनक और बेटियों के लिए उपयोगी हो।” इसके बाद पंचायत स्तर पर योजना तैयार की गई। निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखने के साथ शौचालय को बालिकाओं की जरूरत के मुताबिक तैयार कराया गया। भवन पर ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ का संदेश भी अंकित किया गया है, जो इस पूरे प्रयास की सोच को सामने रखता है।
*निर्माण से ज्यादा महत्वपूर्ण थी सोच*
केसेकोड़ी जैसे दूरस्थ इलाके में बालिकाओं के लिए आधुनिक शौचालय की सुविधा तैयार करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्राथमिकता अक्सर सड़क, नाली, भवन और अन्य अधोसंरचना तक सीमित रहती है। ऐसे में पंचायत ने बालिकाओं की एक बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण जरूरत को प्राथमिकता दी। पंचायत से जुड़े लोगों के मुताबिक, शौचालय निर्माण के दौरान गुणवत्ता से समझौता नहीं करने और इसे बेहतर स्वरूप देने पर जोर दिया गया। इसी सोच का परिणाम है कि केसेकोड़ी का यह शौचालय अब सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश से बाहर भी चर्चा में आया है।
*सरपंच की पहल, प्रशासन का सहयोग*
इस काम को जमीन पर उतारने में ग्राम पंचायत की पहल के साथ प्रशासनिक स्तर पर मिले सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांकेर कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी और कोयलीबेड़ा जनपद पंचायत के सीईओ श्री उदय प्रकाश नाग की निगरानी और सहयोग से पंचायत को योजना को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिली। ग्रामीण स्तर पर किसी अच्छी पहल को केवल पंचायत की उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता। जनप्रतिनिधि की सोच, पंचायत की सक्रियता और प्रशासनिक अधिकारियों के मार्गदर्शन, इन तीनों के समन्वय से ही ऐसी योजनाएं जमीन पर बेहतर रूप लेती हैं। केसेकोड़ी का यह काम इसी समन्वय का उदाहरण है।
*‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ सिर्फ दीवार पर नहीं, सोच में भी*
केसेकोड़ी का बालिका शौचालय यह संदेश देता है कि ग्रामीण विकास केवल बड़े निर्माण कार्यों का नाम नहीं है। किसी गांव की वास्तविक जरूरत को समझना और उसी के अनुरूप सुविधा तैयार करना भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वीबीजी रामजी योजना के तहत प्रदेश का पहला आधुनिक बालिका शौचालय होने का दावा किए जा रहे इस निर्माण की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पंचायत की चर्चा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची है।
फूलबती उसेंडी के लिए यह केवल एक सरकारी योजना का काम नहीं, बल्कि राजधानी में देखे गए एक विचार को अपने गांव तक लाने की कोशिश थी। वह कहती हैं कि “अगर हमारी बेटियों को यह सुविधा पसंद आती है और वे इसका अच्छे से इस्तेमाल करती हैं, तो हमारे लिए यही सबसे बड़ी खुशी है।” केसेकोड़ी की यह कहानी बताती है कि विकास की शुरुआत हमेशा बड़े बजट से नहीं होती। कई बार शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है कि ‘जो सुविधा शहर की बेटियों को मिल रही है, वह हमारे गांव की बेटियों को क्यों नहीं मिल सकती।



