अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग ने पकड़ा जोर, सड़कों पर उतरे क्षेत्रवासी।

अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग ने पकड़ा जोर, सड़कों पर उतरे क्षेत्रवासी।

जिला निर्माण एवं विकास समिति ने निकाली रैली, मुख्यमंत्री के नाम SDM को सौंपा ज्ञापन
अंतागढ़। ब्रिटिश कालीन तहसील अंतागढ़ को स्वतंत्र जिला बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। वर्ष 2012 से चली आ रही इस मांग को लेकर मंगलवार को अंतागढ़ जिला निर्माण एवं विकास समिति के बैनर तले नगर में विशाल रैली निकाली गई। रैली में क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और अंतागढ़ को स्वतंत्र जिला घोषित करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। रैली के दौरान लोगों ने अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग के समर्थन में नारे लगाए और राज्य सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय पहुंची, जहां जिला निर्माण एवं विकास समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम SDM अंतागढ़ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समिति ने अंतागढ़ को स्वतंत्र जिला बनाए जाने की मांग को प्रमुखता से रखते हुए कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, विस्तृत क्षेत्रफल और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों को देखते हुए अब अंतागढ़ को जिला बनाने की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
समिति के अनुसार अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग वर्ष 2012 से लगातार की जा रही है। इस दौरान अलग-अलग स्तर पर शासन और प्रशासन के समक्ष मांग रखी गई है। पूर्व में कांग्रेस शासनकाल के दौरान अंतागढ़ को उप जिले का दर्जा देते हुए यहां अपर कलेक्टर यानी ADM और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यानी ASP स्तर के अधिकारियों की पदस्थापना भी की गई थी। इससे क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी थी कि अंतागढ़ को आगे चलकर पूर्ण जिले का दर्जा मिल सकता है, लेकिन अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि अंतागढ़ भौगोलिक रूप से काफी विस्तृत क्षेत्र है और इसके अंतर्गत कई दूरस्थ एवं अंदरूनी गांव आते हैं। इन गांवों के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए कांकेर जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे ग्रामीणों को समय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। विशेषकर दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों के लिए जिला मुख्यालय तक पहुंचना कई बार काफी कठिन हो जाता है। ऐसे में अंतागढ़ को जिला बनाए जाने से प्रशासनिक सेवाएं लोगों के और करीब पहुंच सकेंगी।
समिति का कहना है कि अंतागढ़ को जिला बनाने का मुद्दा केवल प्रशासनिक सुविधा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र विकास का सवाल है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक अंतागढ़ लंबे समय से विकास की दृष्टि से अपेक्षित गति हासिल नहीं कर पाया है। जिला मुख्यालय बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, कृषि, बैंकिंग तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय कार्यालय खुलने से प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ेंगी और लोगों को स्थानीय स्तर पर ही अनेक सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
रैली में शामिल लोगों ने कहा कि अंतागढ़ की जनता वर्षों से जिला निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है। समय-समय पर ज्ञापन, आंदोलन और विभिन्न माध्यमों से शासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाता रहा है। बावजूद इसके अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं होने से क्षेत्रवासियों में निराशा है। मंगलवार को निकली रैली को इसी लंबे संघर्ष की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
जिला निर्माण एवं विकास समिति ने स्पष्ट किया कि अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की जनता की सामूहिक मांग है। समिति का कहना है कि क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने के लिए अंतागढ़ को स्वतंत्र जिले का दर्जा दिया जाना आवश्यक है। समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वर्षों पुरानी इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
रैली के दौरान क्षेत्रवासियों की बड़ी मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि अंतागढ़ जिला निर्माण का मुद्दा अब एक बार फिर जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि यदि अंतागढ़ को स्वतंत्र जिला बनाया जाता है तो इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्र में विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें राज्य सरकार के निर्णय पर टिकी हुई हैं।



