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चारगांव–मेटाबोदेली माईंस प्रभावित क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को लेकर बढ़ा आक्रोश, 17 फरवरी को चक्काजाम की चेतावनी।

चारगांव–मेटाबोदेली माईंस प्रभावित क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को लेकर बढ़ा आक्रोश, 17 फरवरी को चक्काजाम की चेतावनी।

कोयलीबेड़ा। चारगांव एवं मेटाबोदेली माईंस से प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों में मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि माईंस संचालन से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का सामना वे वर्षों से कर रहे हैं, लेकिन इसके अनुरूप विकास कार्य और बुनियादी सुविधाएं अब तक मुहैया नहीं कराई गई हैं। इससे ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार लगभग तीन माह पूर्व शासकीय आदर्श विद्यालय लामकन्हार, अंतागढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें जिला कलेक्टर, सांसद, विधायक तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक के दौरान प्रभावित गांवों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र समाधान करने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस बैठक में सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, बिजली आपूर्ति सुधार और अन्य विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने की बात कही गई थी, किंतु निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद अधिकांश कार्य अधूरे पड़े हैं।
कोयलीबेड़ा एवं अंतागढ़ ब्लॉक के कई गांव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माईंस गतिविधियों से प्रभावित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की सड़कों की हालत जर्जर है, जिससे आवागमन में भारी परेशानी होती है। पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता है, वहीं बिजली आपूर्ति भी कई जगहों पर बाधित रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि माईंस संचालन से होने वाले लाभ का समुचित हिस्सा स्थानीय विकास पर खर्च नहीं किया जा रहा है।
बैठक में प्रशासन और माईंस प्रबंधन द्वारा आगामी महीनों में अधूरे कार्यों को पूर्ण करने और नई योजनाओं को प्रारंभ करने का भरोसा दिलाया गया था। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है, जिससे लोगों में निराशा और असंतोष का माहौल बन गया है। उनका मानना है कि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
इसी संदर्भ में प्रभावित ग्रामीणों ने माईंस प्रबंधन और शासन-प्रशासन के खिलाफ एसडीएम अंतागढ़ के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में पांच दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई प्रारंभ करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
ग्रामीणों ने 17 फरवरी 2026, मंगलवार को चक्काजाम एवं व्यापक आंदोलन करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर उठाया जा रहा है। अब प्रशासन और माईंस प्रबंधन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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