कांकेर में रामकथा आयोजन का तीसरा दिन, लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़।

कांकेर में रामकथा आयोजन का तीसरा दिन, लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़।

कांकेर। तीसरे दिन की रामकथा सुनाते पं अतुलकृष्ण भारद्वाज ने कहा जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थिति हो परमात्मा को ही साक्षी मानकर कर्म करें तो जीवन में आनंद ही आनंद होता है और परिणाम सुंदर होता है। इसीलिए कहा गया है सत्यम शिवम सुंदरम। मनुष्य को इसी जन्म में इसी जीवन में परमात्मा को प्राप्त करने प्रयास करना चाहिए क्योंकि यह निश्चित नहीं है की अगला जीवन हमें मनुष्य योनी का मिले या नहीं मिले। भक्त नर हैं और भगवान नारायण, भक्त और भगवान के बीच बस यही अंतर है।
कथा के दौरान भजनों पर पंडाल में बुजूर्ग नृत्य करने लगे तो कहा जीवन में तंदुरूस्त रहने का सबसे अच्छा तरीका है नृत्य करते रहिए। अतुलकृष्ण जी ने कहा वे मथुरा क्षेत्र के निवासी हैं जहां की सांसद हेमामालिनी हैं जीवनी उम्र 75 वर्ष हो चुकी है फिर भी वे फिट हैं। हेमा मालिनी अपने फिट रहने का राज नृत्य को ही बताती हैं। वे क्लासिकल नृत्यांगना हैं तथा रोजाना एक घंटे नृत्य का अभ्यास करती हैं। कलयुग में इतना तनाव है इसलिए जीवन में जब भी अवसर मिले भजन कीर्तन के दौरान नृत्य करते रहिए तनाव दूर हो जाएगा। जीवन का सिद्धांत केवल दो बिंदुओं पर है पहला स्वयं को मालिक मानकर तथा दूसरा भगवान को मालिक मानकर। सामान्य व्यक्ति और भक्त के बीच के अंतर को बताते कहा सामान्य व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसे उसके अनुसार फल मिलता है। वहीं भक्त केवल कर्म करता है और सबकुछ भगवान पर छोड़ देता है इसलिए भक्त की चिंता फिर भगवान करते हैं। उदाहरण बताते कहा जैसे अर्जुन की जैसे द्रोपदी की वैसे ही तमाम भक्तों की चिंता भगवान करते हैं। मनुष्य को परमात्मा की सत्ता को मानना चाहिए इसलिए परमात्मा को सत्य कहा गया है। यही कारण है कंस की जेल में जब भगवान कृष्ण प्रकट हुए तो वसुदेव जी ने एक ही श्लोक में उनके लिए नौ बार सत्य शब्द का प्रयोग किया था। जब तक हमारे शरीर में राम हैं तब तक हमारा शरीर सत्य है जैसे ही राम यानी आत्मा निकल जाती है शरीर असत्य हो जाता है। यही कारण है किसी की मृत्यु होने पर श्मशान घाट ले जाते समय राम नाम सत्य है कहा जाता है। व्यक्ति की पहचान उसके आवरण से नहीं आचरण से होती है। इसलिए कपड़ों के आधार किसी का मान सम्मान नहीं बल्कि उसके आचरण से उसका मान सम्मान करना चाहिए। कथा के दौरान हो रहे भजन कीर्तन पर श्रद्धालू झूमते रहे। कथा सुनने बड़ी संख्या में महिलाएं तथा पुरूष पहुंच रहे हैं। तीसरे दिन भी सभी श्रद्धालुओं को आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।



