कामतेड़ा में 11–12 जनवरी को होगा भव्य दो दिवसीय कोलांग महोत्सव।

कामतेड़ा में 11–12 जनवरी को होगा भव्य दो दिवसीय कोलांग महोत्सव।
कोयलीबेड़ा। आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्देश्य से पदल परगना के कामतेड़ा गांव में 11 व 12 जनवरी को दो दिवसीय कोलांग महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव प्रतिवर्ष पूस माह में आयोजित किया जाता है, जो क्षेत्र की आदिवासी पहचान और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
आधुनिकता और बदलती जीवनशैली के कारण आदिवासी समाज की कई परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसे में कोलांग महोत्सव जैसे आयोजन इन परंपराओं को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त प्रयास हैं। महोत्सव के दौरान कोयलीबेड़ा अंचल के भोमरा, कालपाट और पदल परगना के साथ-साथ हुरेवाही एवं कोलर परगना के ग्रामीण बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
दो दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक आयोजन में कोलांग, चिटकुल, छेरका, पुन्नी नाच सहित अनेक पारंपरिक आदिवासी नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर प्रस्तुत होने वाले ये नृत्य न केवल दर्शकों को आनंदित करेंगे, बल्कि आदिवासी जीवनशैली, प्रकृति से जुड़ाव और सामाजिक समरसता का संदेश भी देंगे।
आयोजकों का कहना है कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को अपनी लोक कला, नृत्य, गीत और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है, ताकि वे अपनी जड़ों को पहचान सकें और भविष्य में इन परंपराओं को आगे बढ़ा सकें। इसके साथ ही यह आयोजन विभिन्न परगनाओं के ग्रामीणों को एक मंच पर लाकर आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देता है।
कोलांग महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। ग्रामीण स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं और आयोजन को सफल बनाने के लिए समाज के वरिष्ठजन, युवा और महिला समूह सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। यह महोत्सव न सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता, एकता और गौरव का प्रतीक भी है।



