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ब्लॉक मुख्यालय कोयलीबेड़ा की वर्षों से उपेक्षा के विरोध में 2 फरवरी को बड़ा आंदोलन, सर्व समाज करेगा धरना-प्रदर्शन व चक्काजाम।

कोयलीबेड़ा की वर्षों से उपेक्षा के विरोध में 2 फरवरी को बड़ा आंदोलन, सर्व समाज करेगा धरना-प्रदर्शन व चक्काजाम।

कोयलीबेड़ा। कोयलीबेड़ा क्षेत्र की लगातार हो रही अनदेखी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से त्रस्त ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है। वर्षों से शासन-प्रशासन के समक्ष मांग रखे जाने के बावजूद किसी ठोस पहल के अभाव में आक्रोशित ग्रामीणों ने आगामी 02 फरवरी 2026 को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन, रैली एवं चक्काजाम आयोजित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। यह आंदोलन सर्व समाज ST, SC एवं OBC के संयुक्त बैनर तले किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह किसी एक वर्ग का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की जनभावनाओं से जुड़ा आंदोलन है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोयलीबेड़ा को ब्लाक मुख्यालय का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद आज भी अधिकांश शासकीय कार्यालयों का संचालन अन्य स्थानों से किया जा रहा है, जिससे आम जनता को अपने छोटे-छोटे शासकीय कार्यों के लिए समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी करनी पड़ती है। बार-बार ज्ञापन सौंपे जाने के बाद भी जब इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो लोगों में प्रशासन के प्रति असंतोष गहराता चला गया। इसी तरह क्षेत्र में जिला सहकारी बैंक की स्थापना न होने से किसानों, लघु व्यापारियों और आम नागरिकों को आर्थिक लेन-देन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में कोयलीबेड़ा की स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां आज तक महाविद्यालय की स्थापना नहीं हो पाई है, जिसके कारण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है। कई गरीब परिवारों के लिए यह आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पाता, जिससे बड़ी संख्या में युवा शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कॉलेज की स्थापना की जाती, तो क्षेत्र के युवाओं को बेहतर भविष्य मिल सकता था।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। अस्पताल भवन की कमी, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की अपर्याप्त संख्या के चलते गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कई बार मरीजों को मजबूरी में दूर स्थित अस्पतालों में ले जाना पड़ता है, जिससे जान जोखिम में पड़ जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन द्वारा स्वीकृत संसाधनों का लाभ क्षेत्र तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है।
इसके अलावा चारगांव माइंस से संबंधित सीएसआर मद के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए निर्धारित सीएसआर राशि का उपयोग पारदर्शी ढंग से नहीं किया गया है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में इस राशि का सही उपयोग हो।
इन सभी मुद्दों को लेकर 02 फरवरी को कोयलीबेड़ा बाजार स्थल से तहसील कार्यालय रंगमंच के सामने तक रैली निकाली जाएगी, जिसके बाद सभा का आयोजन कर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उनकी जायज और बुनियादी मांगों की अनदेखी की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।

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