मन्हाकाल में नवीन धान खरीदी केंद्र जल्द शुरु करने की मांग तेज, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार

मन्हाकाल में नवीन धान खरीदी केंद्र जल्द शुरु करने की मांग तेज, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
कोयलीबेड़ा। कोयलीबेड़ा विकासखंड के मन्हाकाल क्षेत्र में नवीन धान खरीदी केंद्र की स्थापना की मांग इन दिनों जोर पकड़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीण आज कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासन को मांग पत्र सौंपकर जल्द से जल्द आदेश जारी करने की गुहार लगाई। ग्रामीणों का कहना है कि इस समय क्षेत्र में धान कटाई और मिंजाई जोरों पर चल रही है, लेकिन खरीदी केंद्र शुरू न होने से किसानों को अपनी उपज बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान अपनी फसल घरों में सुरक्षित रखने को मजबूर हैं, जिससे परिवहन व भंडारण दोनों में परेशानी बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व क्षेत्रीय विधायक विक्रम देव उसेंडी स्वयं मन्हाकाल पहुंचे थे और नवीन खरीदी केंद्र के संभावित स्थल का निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नवीन धान खरीदी केंद्र की घोषणा की थी। इस घोषणा से किसानों में उम्मीद जगी थी कि जल्द ही स्थानीय स्तर पर खरीदी की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी और उन्हें दूरस्थ केंद्रों तक अपनी उपज ले जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी। लेकिन अब तक आदेश जारी न होने से किसान चिंतित हैं, क्योंकि समय पर खरीदी केंद्र शुरू न होने पर फसल बेचने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर ग्रामीणों ने बताया कि मन्हाकाल, छोटेबोदेली, कड़मे और आसपास की कई बस्तियों के किसान लंबे समय से खरीदी केंद्र की मांग कर रहे हैं। यदि आदेश जल्द जारी हो जाता है, तो किसान तुरंत अपनी उपज बेचना शुरू कर सकते हैं और खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी। जनदर्शन में उपस्थित ग्रामीणों में छोटेबोदेली और कड़मे के सरपंच भी शामिल रहे, जिन्होंने किसानों की स्थिति और आवश्यकता को विस्तार से रखते हुए कहा कि खरीदी केंद्र खुलने से न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि-आधारित आर्थिक गतिविधियाँ भी गति पकड़ेंगी।
कलेक्टर ने मांग पत्र प्राप्त कर ग्रामीणों को आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब पूरा क्षेत्र प्रशासनिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है, ताकि किसानों की मेहनत की फसल समय पर खरीदी जा सके और उन्हें किसी तरह की आर्थिक हानि न उठानी पड़े।

