छत्तीसगढ़

सावित्रीबाई फुले  एवं जयपाल सिंह मुंडा जी की जयंती पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम व संगोष्ठी कार्यक्रम का कोयलीबेड़ा में हुआ आयोजन

सर्व समाज महिला प्रकोष्ठ ब्लॉक कोइलीबेड़ा के नेतृत्व में महान समाज सेवीका ज्ञान ज्योति सावित्रीबाई फुले  एवं जयपाल सिंह मुंडा जी की जयंती पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम व संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन ग्राम कोयलीबेड़ा के पावन धरती पर किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता सुश्री राजेश्वरी उइके कर रही थी। कार्यक्रम का शुभारंभ के समय ग्राम पंचायत कोइलीबेड़ा सरपंच रमोतीन पुजारी परगना के मांझी, ग्राम गायता, पटेल अतिथियों द्वारा सावित्रीबाई फुले व जयपाल जी मुंडा की  छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया।वक्ताओं ने सावित्रीबाई के कार्यों को याद किया।
वही महिलाओं ने समाज को सशक्त बनाने का सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
*मुख्य अतिथि सुश्री गरिमा सिदार अधिवक्ता ने कहा* ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले दोनों का मानना था कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे महिलाएँ और दबे-कुचले वर्ग सशक्त बन सकते हैं और समाज के अन्य वर्गों के साथ बराबरी से खड़े होने की उम्मीद कर सकते हैं।
भारत के सामाजिक और शैक्षणिक इतिहास में महात्मा जोतिराव फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले एक असाधारण युगल के रूप में विख्यात हैं। वे पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता और सामाजिक न्याय के लिए एक आंदोलन का निर्माण करने हेतु आवेग-पूर्ण संघर्ष में लगे हुए थे।सावित्रीबाई फुले और ज्योतिराव फुले ने मिलकर वर्ष 1854-55 में भारत में साक्षरता मिशन भी शुरू किया था।10 मार्च, 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया। गौरतलब है कि प्लेग महामारी के दौरान सावित्रीबाई प्लेग के मरीज़ों की सेवा करती थीं। प्लेग से प्रभावित एक बच्चे की सेवा करने के कारण वह भी प्लेग से प्रभावित हुईं और इसी कारण से उनकी मृत्यु हो गई।आगे जयपाल सिंह मुंडा जी की भी जयंती है जिन्होंने एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की और 1928 में देश को पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया।और महिलाओं के लिए कानूनी जानकारी के साथ साथ नया शिक्षा नीति के बारे में भी जानकारी शेयर की।
सर्व समाज महिला का प्रकोष्ठ अध्यक्ष ने कहा कि सावित्रीबाई फुले जी देश की पहली बालिका विद्यालय की पहली शिक्षिका प्रधानाध्यक और पहले स्कूल की संस्थापक थी। सावित्रीबाई फुले का भारत मे सामाजिक सुधार आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान है।
,,,विशेष अतिथि श्रीमती जागेश्वरी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले जी देश की पहली बालिका विद्यालय की पहली शिक्षिका प्रधानाध्यक और पहले स्कूल की संस्थापक थी। सावित्रीबाई फुले का भारत मे सामाजिक सुधार आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान है।
*लक्ष्मी नेताम अध्यापिका प्रा०शा०केसेकोड़ी* ने कहा की महिलाओं को शिक्षित करने के लिए प्रयासों के लिए आजीवन संघर्ष करती रहीं। ज्योतिबा राव फुले सावित्रीबाई फुले संरक्षक गुरु और पथ प्रदर्शक थे। सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन को मुहिम की तरह जिया।उनका उद्देश्य विधवा विवाह कराना, छुआछूत मिटाना,महिलाओं की मुक्ति और महिला की शिक्षित बनाना।
*श्रीमती मैनी कचलामी* बस्तर संघर्ष समिति उपाध्यक्ष कहा सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 को हुआ था।
उनकी उपलब्धियों के कारण उन्हें विशेष रूप से भारत की पहली महिला शिक्षक के रूप में याद किया जाता है। सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्राचार्या बनी थीं।
उन्होंने सदैव शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में महिलाओं और अछूतों उत्थान के लिये काम किया। और आगे बच्चो को पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
*लक्ष्मी नेताम अध्यापिका प्रा०शा०केसेकोड़ी* ने कहा की महिलाओं को शिक्षित करने के लिए प्रयासों के लिए आजीवन संघर्ष करती रहीं। ज्योतिबा राव फुले सावित्रीबाई फुले संरक्षक गुरु और पथ प्रदर्शक थे। सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन को मुहिम की तरह जिया।उनका उद्देश्य विधवा विवाह कराना, छुआछूत मिटाना,महिलाओं की मुक्ति और महिला की शिक्षित बनाना।
*रीना बघेल जनपद सदस्य कोयलीबेडा* ने कहा सवित्रीबाई फुले एक कवयित्री थी।उन्हें मराठी आदि कवयित्री के रूप में जाना जाता है।जब समाज मे महिलाओं व बच्चों को मातृस्नेह व संरक्षण दिया। इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि श्रीमती प्रभा मरकाम, श्रीमती सीमा सिंह, श्रीमती जागेश्वरी दुग्गा, श्रीमती पुन्नू बघेल, श्रीमती हेमा हुपेंडी, सुश्री कौशल्या ठाकुर, श्रीमती मनोत्री ध्रुवा जिसमें सर्व समाज महिला प्रकोष्ठ ब्लॉक कोइलीबेड़ा अध्यक्ष सुश्री राजेश्वरी उइके, उपाध्यक्ष रोशनी अचला, सचिव कालेश्वरी आचला, कोषाध्यक्ष मानबती आचला सदस्य माहेश्वरी मरकाम, आरती उसेंडी, दीपिका, पुलबती जाड़े, पूजा जुर्री एवं क्षेत्र जनप्रतिनिधि 18 पंचायत के सरपंचगढ़,सामाजिक कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एवं क्षेत्र की 68 गांव की ग्रामीण उपस्थित थे।

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