छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश

विश्वकर्मा जयंती पर जिरामतरई में विश्वकर्मा समाज ने मनाई जयंती।

विश्वकर्मा जयंती पर जिरामतरई में विश्वकर्मा समाज ने मनाई जयंती।

कोयलीबेड़ा- विश्वकर्मा जयंती पर कोयलीबेड़ा अंचल के जिरामतरई में 18 पँचायत, तीनो परगना के अंतर्गत सभी गांवो के विश्वकर्मा परिवार द्वारा आज जयंती पर विशेष पूजा अर्चना कर अपने इष्ट देव को नमन किया गया । विश्वकर्मा (लोहार) समाज द्वारा जयंती के अवसर पर हर साल यह आयोजन किया जाता है। जिसमे क्षेत्र के ग्रामीणों को भी आमंत्रण दीया जाता है। दिन भर पूजा अर्चना के पश्चात रात में रामायण पाठ व अगली सुबह पूजन के पश्चात मूर्ति विषर्जन का कार्यक्रम होता है।

विश्वकर्मा जयंती पर जिरामतरई में आयोजित हुई कार्यक्रम।18 पँचायत के विश्वकर्मा परिवार हुए शामिल।

अन्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा जी हैं। इस कारण से विश्वकर्मा जयंती पर यंत्रों, दुकानों, कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में लगी कलपुर्जों और मशीनों की पूजा की जाती है।
भगवान विश्वकर्मा ने रावण की लंका, देवलोक,भगवान कृष्ण की द्वारिका और महाभारत काल में इंद्रप्रस्थ का निर्माण किया था।

आज यानी 17 सितंबर 2023, रविवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती है। हिंदू पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा प्राकट्य दिवस हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विशेष रूप में पूजा-आराधना की जाती है। हर साल सृष्टि के सबसे बड़े और अद्भुत शिल्पकार विश्वकर्माजी की पूजा का पर्व बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा जी सृष्टि के पहले शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार जब ब्रह्राजी ने सृष्टि की रचना की तो इसके निर्माण कार्य की जिम्मेदारी भगवान विश्वकर्मा जी को दी। शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ब्रह्राा जी के सातवें पुत्र हैं।
हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों, कारखानों और विशेष तौर पर औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों और दुकानों आदि की पूजा की जाती है। दरअसल विश्वकर्मा जी को यंत्रों का देवता भी माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में देवी- देवताओं के महल और अस्त्र-शस्त्र भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाए थे इसलिए इन्हें वास्तुकार और निर्माण का देवता कहा जाता है। धार्मिक मान्याताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा जी ने इंद्रलोक, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका एवं हस्तिनापुर, कलयुग में जगन्नाथपुरी आदि का निर्माण किया था। इसके अलावा शिव जी का त्रिशूल, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज और भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र को भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्कर्मा वे देवता हैं जो हर काल में सृजन और निर्णाण के देवता रहे हैं। विश्वकर्मा जी को यंत्रों का देवता भी माना गया है। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी चीजें सृजनात्मक हैं, सब भगवान विश्कर्मा की देन है। इस कारण से किसी कार्य के निर्माण और सृजन से जुड़े हुए लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button