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लाल सागर में हूती विद्रोहियों का हमला दुनिया के लिए बना सिरदर्द, जानें भारत क्यों है बेचैन।

लाल सागर में हूती विद्रोहियों का हमला दुनिया के लिए बना सिरदर्द, जानें भारत क्यों है बेचैन

नई दिल्ली। लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से किए जा रहे हमले का असर भारत पर भी पड़ सकता है. हुती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिका ने मोर्चा संभाल लिया है. हाल फिलहाल में भारत ने भी करारा जवाब दिया था और नौसेना ने समंदर में अपहरण किए गए शिप को बचाया था. लाल सागर में हूती विद्रोहियों की ओर से किए जा रहे हमले का असर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है.

दरअसल, लाल सागर में हूतियों की ओर से किए जा रहे हमले के बाद से शिपिंग कंपनियां इस रूट का इस्तेमाल करने में हिचकिचा रही हैं. कंपनियों के भीतर इस बात का डर है कि अगर उनका शिप हूती विद्रोहियों की चंगुल में फंस गया तो लेनी की देनी पड़ सकती है. इसलिए ज्यादातर शिपिंग कंपनियां फिलहाल लाल सागर से जाने की बात तो छोड़िए उधर देखने से भी कतरा रही हैं.

*सप्लाई चेन पर पड़ेगा असर:*

शिपिंग कंपनियां अगर लाल सागर के रास्ते की जगह किसी दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करती हैं तो इसका असर सीधे-सीधे देश की अर्थव्यवस्था यानी आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि लाल सागर के अलावा भारत के पास जो दूसरा रास्ता मौजूद है वो अभी की तुलना में दूर भी है और घुमावदार भी. मतलब अगर भारत की शिपिंग कंपनियां दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करती हैं तो वो लाल सागर की तुलना में ज्यादा खर्चीला होगा. खर्चीला होगा तो स्वाभाविक रूप से कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा.

आयात-निर्यात में समय ज्यादा लगेगा तो उसका सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा. अगर सप्लाई चैन में गड़बड़ी आई तो बाजार में उन चीजों के दाम आसमान छू सकते हैं जिनका उत्पादन भारत में नहीं होता है. इन सामानों के दाम तो बढ़ेंगे ही साथ ही साथ वेटिंग टाइम भी बढ़ जाएगा. इसलिए व्यापार के लिहाज से लाल सागर के रास्ते को भारत के लिए सबसे सुगम माना जाता है.

*समुद्री व्यापार के लिए भारत के पास दो विकल्प:*

समुद्री व्यापार के लिए भारत के पास दो रास्ते मौजूद है. पहला रास्ता लाल सागर है जिसका इस्तेमाल मौजूदा वक्त में किया जा रहा है. दूसरा रास्ता केप ऑफ गुड होप है. ये दोनों ही रास्ते आगे जाकर स्वेज नहर से जुड़ते हैं. स्वेज नहर जो कि एशिया और यूरोप को जोड़ने का काम करता है. लाल सागर से स्वेज नहर की दूरी 10 हजार नॉटिकल माइल्स यानी 18520 किलोमीटर के आसपास है और जहाजों को यहां तक पहुंचने में करीब 25 दिन का समय लगता है.

*लाल सागर की तुलना में क्यों खर्चीला है दूसरा रास्ता:*

जहां तक बात केप ऑफ गुड होप के रास्ते की है तो लाल सागर की तुलना में इसकी दूरी ज्यादा है. भारत की शिपिंग कंपनियां अगर इस रास्ते से कोई जहाज भेजती हैं तो उन्हें स्वेज नहर तक पहुंचने के लिए 13500 नॉटिकल माइल्स यानी करीब 25 हजार किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी. मतलब लाल सागर की रास्ते की तुलना में जहाजों को करीब 7000 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी.

*भारत में बढ़ सकती है महंगाई:*

भारत के यूरोपीय देशों के साथ भी व्यापार है और सामानों का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट होता है. आयात में कच्चा तेल भी शामिल है जिसे भारत विदेशों से खरीदता है. इन कच्चे तेलों को जहाजों के जरिए भारत लाया जाता है. ऐसे में अगर कच्चे तेल के आयात पर खर्च बढ़ेगा तो देश में डीजल और पेट्रोल के दाम भी बढ़ सकते हैं. जब डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे तो देश में महंगाई दर बढ़ जाएगी और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाएंगी. इसलिए लाल सागर को भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है.

*अमेरिका ने फिर से हूती विद्रोहियों पर बोला है हमला:*

अमेरिका ने ब्रिटेन ने शुक्रवार को हूती विद्रोहियों पर हमला किया था. इसके बाद अमेरिका ने शनिवार को एक बार फिर से अटैक किया. शनिवार का हमला यमन में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले स्थान पर किया गया. शुक्रवार को जो हमला हुआ था उसमें हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले 28 स्थानों में करीब 60 ठिकानों पर हमला किया गया था. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने जो बाइडन ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि हूती विद्रोहियों को और हमले का सामना करना पड़ सकता है.

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