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पीजी कालेज कांकेर में अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष पर परिचर्चा कार्यक्रम किया गया।

पीजी कालेज कांकेर में अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष पर परिचर्चा कार्यक्रम किया गया।

कांकेर। भानुप्रतापदेव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग में प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष मनाया गया। इस हेतु सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। चंचल ध्रुव ने कोदोकुटकी के फायदे बताए और वर्तमान परिवेश में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। यानूराम साहू ने रागी के फायदे बताए एवम बस्तर को पोषक तत्वों वाले अनाज के सेवन में अग्रणी बताया। दुर्गेश्वरी ने ज्वार की उपयोगिता बताते हुए मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के नियंत्रण में इसके सेवन को लाभकारी बताया। गोदावरी मरकाम ने इसे स्वस्थ जीवन का आधार बताते हुए बच्चों एवम बड़ों सभी के लिए इनमें छुपे विटामिन तत्त्वों को आवश्यक बताया। नीलम रामटेके ने मोटे अनाज को कम पानी और काम खाद में आसानी से उगाया जाने वाला वरदान कहा। इसी प्रकार मानसी, अंबिका, रामेश्वरी, सुदनी, दीपिका, अरुण, शैलेंद्र और साधना आदि सभी छात्र छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मिलेट के बारे में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ.स्वामीराम बंजारे ने इसे शक्ति का स्रोत बताया उन्होंने कहा कि बारीक और पतले अनाज पाचन में सहायक नहीं होते और पॉलिश हो जाने से उनके पोषक तत्त्व भी नष्ट हो जाते हैं इसलिए प्राचीन तरीके से ही अनाज को उगाया और खाया जाना चाहिए। पकाने की विधि भी पूर्व की भांति हो तो अधिक लाभ होता है। प्रोफ़ेसर नवरतन साव ने कहा की यह अनाज भारतवर्ष में बहुत पहले से ही उगाया और खाया जाता रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो आज भी घर- घर खाया जाता है। पर लोग इसे गरीबों का भोजन मानते रहे हैं और इसे अधिक महत्व नहीं दिया जाता रहा है। समय के साथ लोगों ने इसकी महत्ता पहचानी है। प्रोफेसर विजय प्रकाश साहू ने कोदो कुटकी ज्वार बाजरा के उत्पादन कम होने के दो प्रमुख कारण बताए। पहला स्वाद की कमी और दूसरा इसे सस्ता और सुलभ माना जाना। वर्तमान में इसकी उपयोगिता बढ़ी है और अब यह अमीरों का भोजन बन गया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा परिहार के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में परिश्मा मरकाम, रीना, मंजू नाग, नेमिन, रीतेश्वरी, उर्वशी, करिश्मा ठाकुर के विचार भी सराहनीय रहे।

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