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आदिम ज्ञान बोध संस्कार शिक्षा केंद्र गोटूल विद्यालय सुलंगी में मनाया गया तीसरा वर्षगांठ।

पर्यावरणविद, भाषाचार्य शेरसिंह आचला रहे मौजूद।

आदिम ज्ञान बोध संस्कार शिक्षा केंद्र गोटूल विद्यालय सुलंगी में मनाया गया तीसरा वर्षगांठ।

आदिम ज्ञान बोध संस्कार शिक्षा केन्द्र गोटूल विद्यालय सुलंगी में तीसरी वर्षगांठ पर हुए विविध आयोजन।

लिंक में देखिए आयोजन से जुड़ी प्रमुख झलकियां

कोयलीबेड़ा । जनजातीय संस्कृति संरक्षण और शिक्षा का विकास उद्देश्य पर आधारित आदिम ज्ञान बोध संस्कार शिक्षा केंद्र गोटूल विद्यालय सुलंगी में तीसरी वर्षगांठ पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया गया।
आदिम जनजातियों के प्राचीन जीवन शैली परम्परा कृषि शिक्षा वन औषधि चिकित्सा ज्ञान एवं मातृ भाषा संस्कृति संरक्षण संग्रहालय गोटूल विद्यालय की स्थापना के तृतीय वर्षगांठ मनाई गई। कार्यक्रम के दौरान जनजातीय संस्कृति का संरक्षण और शिक्षा का विकास विषय पर चर्चा की गई। भोमराकोट मोडेमरका में स्थित उसेहमुदियाल पेन कड़ा से सम्बंधित टण्डा, मण्डा, कुण्डा की पेन व्यवस्था के शोध एवं अध्ययन फिल्ड प्रदर्शन कार्यशाला में विचार गोष्ठी रखा गया। भोमरा कालपाट और पद्दाल परगना के सुप्रसिद्ध ख्याति प्राप्त पूर्वज जो वर्तमान में इस दुनिया में नहीं है ऐसे अनेक लोग थे जिन्होंने अपने जीवन काल में पेन गायता गढ़ गायता, नार्रगायता, पेनमांझी, पेनओ चलुनदार बैद्य, बैगा, सिरहा-गुनिया और नाम जागी शिकारी तथा काष्ठ कला, हस्तकला, गीत-संगीत, नृत्य के कलाकार गोटकार- बोलकार इत्यादि में विख्यात रहे हैं उनके स्मृति को याद किया गया।
इस दौरान लुप्त प्राय ऐतिहासिक धरोहर से सम्बंधित कलाकृतियां, कृषि औजार खान-पान के तौर-तरीकों तथा ताना-बाना, वेशभूषा का प्रदर्शन) किया गया
कार्यक्रम के दौरान लोककथा कहानियों के जानकार वृद्ध जनों द्वारा वाचन एवं लोकगीत नृत्य कला की प्रस्तुति दी गयी।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अथितियों का सम्मान एवं उनके द्वारा संगोष्ठी विषय अंतर्गत अभिभाषाण दिया गया।
गोंडी भाषाचार्य व पर्यावरणविद सम्माननीय शेरसिंह आचला ने बताया कि कोयलीबेड़ा अंचल में आदिम संस्कृति के संरक्षण को लेकर यह पहल की गई है जहां सुलंगी में इन विषयों की बारीकियों को नई पीढ़ियों को बताया जा रहा विद्यालय स्थापना को आज तीन वर्षों पूरे हो चुके हैं यहां 42 बच्चे अपनी स्कुली शिक्षा के साथ ही आदिम संस्कृति की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और पर्यावरण की बारीकियों को भी सीख रहे हैं समय के साथ विद्यालय में विस्तार की पूर्ण सम्भावना है और जिस प्रकार यहां सुलंगी में आमजन और ग्रामीणों का सहयोग मिल रहा गोटूल शिक्षा केन्द्र एक नई पहचान अवश्य ही बनाएगा ऐसी कोशिश रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान शेरसिंह आचला,देव मण्डावी, रतन आचला, फूलसिंह उसेण्डी, मनेश दर्रो, मुकेश उसेण्डी, श्रीराम उसेण्डी, दलपत उसेण्डी व ग्राम पटेल गायता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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