सरोना के शिक्षक शेख इमरान उल्लाह ने गुवाहाटी में आयोजित शिक्षा में कठपुतली का उपयोग राष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा लिया
सरोना के शिक्षक शेख इमरान उल्लाह ने गुवाहाटी में आयोजित शिक्षा में कठपुतली का उपयोग राष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा लिया
कांकेर। भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली के अंतर्गत सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र सी. सी. आर. टी. गुवाहाटी (असम) में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में एनईपी 2020 के अनुरूप शिक्षा में कठपुतली कला की भूमिका विषय पर देश के 12 राज्यों से 75 प्रतिभागियों ने शिरकत की छ.ग. राज्य से अलग – अलग जिलों से सात प्रतिभावान शिक्षको का चयन किया गया जिसमें कांकेर जिले में कन्या प्राथमिक शाला सरोना के शिक्षक शेख इमरान उल्लाह ने प्रतिनिधित्व किया। कठपुतली से सीखने से विद्यार्थियों को विविध संस्कृतियों का सम्मान करने बहुसंस्कृतिवाद को समझने में मदद मिलती है। शिक्षक शेख इमरान उल्लाह ने बताया कि देश के विभिन्न प्रांतो से आये शिक्षक अपने – अपने प्रांतो की कला, संस्कृति, नृत्य परम्परा ऐतिहासिक धरोहरो, खान-पान, रिती-दिलाजो की जानकारी आपस में साझा की। राष्ट्रीय स्तर पर छग की समृद्ध कला संस्कृति और सुवा, कर्मा, पंथी, राऊत नाचा देख सभी प्रतिभागी भूम उठे। कार्यशाला में शिक्षको ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को शैक्षिक रूपरेखा में शामिल करने के तरिको पर विचार मंथन कर नई शिक्षा नीति के अनुसार कला आधारित शिक्षण अधिगम में सभी विषयो को कला के साथ जोड़ते हुए शिक्षण अधिगम को बहुत ही सरल और रोचक बनाने की प्रतिबद्धता की ही छग के जांजगीर चापा से प्रमोद कुमार टंडन, सूरजपुर से धर्मानंद गोजे, कबीर धाम से जगदीश विदोहिया, मुंगेली से दुधारांनी शर्मा, बीजापुर से शांतिलाल वर्मा एवं जरासन सोनवाली सम्मलित हुए। इस कार्यशाला में कठपुतली कला के विभिन्न आयाम के अंतर्गत ग्लोबस पपेट, रोड पपेट, स्टिंग पपेट, सेडो पसेट, मुक अभिनय कला शिक्षा में इसकी उपयोगिता तथा शैक्षिक शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत कामख्या मंदीर, बॉटेनिकल गार्डन दिखाया गया। कार्यशाला में छ.ग. के अलावा उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, पुणूचेरीऔर चंडीगढ़ के हुए शामिल होकर अपनी संस्कृति सभा की।



