छत्तीसगढ़

प्राथमिक शालाओं के लिए गोंडी भाषा में पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक निर्माण कार्यशाला मे जूटे बस्तर संभाग के गोंडी भाषा जानकार।

प्राथमिक शालाओं के लिए गोंडी भाषा में पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक निर्माण कार्यशाला मे जूटे बस्तर संभाग के गोंडी भाषा जानकार।


कोयलीबेड़ा। मातृ भाषाओं में प्राथमिक शिक्षा को प्राथमिक स्तर पर शामिल करने के राज्य सरकार के निर्देश के परिपालन में राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद शंकर नगर रायपुर छत्तीसगढ़ में गोंडी भाषा के पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तक निर्माण कार्यशाला दिनांक 4 और 5 अक्टूबर को आयोजित हुई इस कार्यशाला में बस्तर संभाग के गोंडी भाषा के साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक भाषाविद शामिल हुए। संस्था के बहुभाषी विभाग द्वारा प्रथम दिवस कक्षावार योजनाबद्ध पाठ्यक्रम की रूप रेखाप्रस्तुत कर भाषाविदों का पांच समूह बना कर पहली से पांचवी तक पाठ्यक्रम निर्माण हेतु गोंडी भाषा में प्रचलित गद्य पद एवं स्वरचित रचनाओं को संकलित किया गया। कार्यशाला मे रमेश दुग्गा, पटाव सुकदु ,रामलाल मंडावी दिलीप उसेंडी, मेहतू कुमेटी अभिलाल सोरी, राजीव धुर्वा, मनऊ गोटा,मासाराम कुंजाम,संतलाल दुग्गा, बचनूराम भोगामी, धनाजु नरेटी एवं अन्य साहित्यकार शामिल हुए।
द्वितीय दिवस कार्यशाला के अध्यक्ष जेपी रथ द्वारा भाषा के महत्व पर सारगर्भित प्रकाश डाला गया वरिष्ठ भाषाविद श्री चितरंजन कर एवं अन्य भाषा के जानकार कार्यशाला में उपस्थित रहे।

कोया माटा संरक्षण परिषद उत्तर बस्तर के सदस्य मुकेश उसेण्डी ने बताया की गोंडी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने,इसके ऐतिहासीक महत्व को समझने, पूरे क्षेत्र में गोंडी भाषा के महत्व को बताते हुए स्थानीय भर्ती भी जल्द शुरू करने की पहल, अनुसूचित क्षेत्र में भर्ती के दौरान स्थानीय बोली भाषा के जानकारों को प्राथमिकता सहित आदि बातें सामने आएंगी जिसके लिए प्रयास जारी रहेगा।

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