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संघर्ष से सम्मान तक, सगनूराम आंचला के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव.

*संघर्ष से सम्मान तक, सगनूराम आंचला के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव*

उत्तर बस्तर कांकेर, 07 अपै्रल 2026/ सगनूराम आंचला की जीवन यात्रा एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो यह दर्शाती है कि सही दिशा और अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को नई राह दे सकता है। सगनूराम बताते हैं कि वे पहले नक्सल गतिविधियों से जुड़े हुए थे। उनका अधिकांश समय जंगलों में भटकते हुए बीतता था, जहां न तो स्थायित्व था और न ही भविष्य की कोई स्पष्ट दिशा। लेकिन शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया और कांकेर में आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण के बाद उन्हें भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम मुल्ला (चौगेल) स्थित पुनर्वास केंद्र में 3 माह का कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने राजमिस्त्री, काष्ठ शिल्प कला के साथ-साथ इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण भी हासिल किया। साथ ही उन्होंने अपनी अधूरी शिक्षा को पूरा करते हुए पहली से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई भी पूरी की। आज सगनूराम अपने सीखे हुए हुनर के दम पर एक निजी फर्म में इलेक्ट्रिशियन के रूप में चयनित हो चुके हैं, जहां उन्हें प्रतिमाह 15,000 रुपये वेतन मिलेगा। वे जल्द ही इस कार्य में जुड़ने वाले हैं और अपने नए जीवन को लेकर बेहद उत्साहित है।
सगनूराम आंचला ने इस सकारात्मक बदलाव के लिए केंद्र और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है। उनकी यह सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों के कारण भटके हुए हैं, सही मार्ग चुनकर जीवन को नई दिशा दी जा सकती है। इसी तरह प्रशिक्षण देकर उन्हें सुनयोजित कर कांकेर जिला बस्तर संभाग में रोजगार देने वाला प्रथम जिला बन गया है।

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